वियतनामी कवि हू थिंह की लिखी इस कविता में प्रश्न सरल है ...
किन्तु उत्तर :-)
मैंने मिट्टी से पूछा:
कैसे रहती है मिट्टी मिट्टी के साथ?
- हम परस्पर करते हैं सम्मान .
मैंने पानी से पूछा:
कैसे रहता है पानी पानी के साथ?
- हम परस्पर को करते हैं परिपूर्ण .
मैंने घास से पूछा:
कैसे रहती है घास घास के साथ?
- हम परस्पर में गुँथ कर करते हैं क्षितिज निर्माण .
मैंने मनुष्य से पूछा:
कैसे रहता है मनुष्य मनुष्य के साथ?
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कैसे रहता है मनुष्य मनुष्य के साथ?
..... ..... ..... .....
मैंने मनुष्य से पूछा:
कैसे रहता है मनुष्य मनुष्य के साथ?