Friday, 23 March 2012

एक मीठा सा हिमाचली लोकगीत ...

हिमाचल में रहते हुए वहां के लोकगीतों की मिठास से खुद को दूर रखना ना-मुमकिन है. काँगड़ा में हुई एक लोकगीत प्रतियोगिता में पहली बार एक छोटी सी लड़की के मुंह से सुना ये मीठा सा गीत ... और तब जब मैं इसका अर्थ भी नहीं जानती थी, ये मेरे दिल में कहीं गहरा उतर गया. बाद में मालूम चला कि माने हुए पार्श्व गायक मोहित चौहान ने इसे गाया है, और वो खुद भी काँगड़ा,हिमाचल प्रदेश से हैं .
                 मोहित की आवाज़ की उदासी और अनगढ़ सम्मोहन, इस गीत का अर्थ जानने के बाद और भी गहराई से महसूस होता है. सभी लोकगीत आम तौर पर बहुत सादा भाषा में और बहुत सीधे सादे विषय पर लिखे होते हैं... तभी तो लोगों के गीत कहलाते हैं. पर बहुत गूढ़ अर्थ लिए  होते हैं ये सीधे सादे सुनाई देने वाले मीठे से गाने .
     
           इस गीत में माँ का बेटी के साथ संवाद है -
माँ बेटी से पूछती है कि वह इतनी कमज़ोर क्यों होती जा रही है?
बेटी उत्तर देती है कि पास के वन में जब मोर बोलते हैं तो वह रात भर सो नहीं पाती है.
इस पर माँ कहती है वह शिकारियों को बुला कर मोरों को मरवा देगी. 
बेटी माँ से कहती है वह मोरों को मरवाए नहीं, क्योंकि वह उन्हें खोना नहीं चाहती. वह उन्हें पकड़ कर पिंजरे में डलवा दे.
फिर, बेटी माँ से पूछती है चाँद और तारे दिन होने पर कहाँ चले जाते हैं, और जिन्हें हम प्यार करते हैं वे लोग कहाँ चले जाते हैं?
माँ इस पर उत्तर देती है कि चाँद और तारे दिन होने पर छिप जाते हैं, पर जिन्हें हम प्यार करते हैं वे कभी नहीं छिपते . 
           अब इस का अर्थ जान लेने के बाद, इस सादा, मीठे और खूबसूरत हिमाचली लोकगीत को सुनते हैं - ' अम्मा पुछदी '

                               - मीता.

2 comments:

leena alag said...

how soothing...sooo simple...unpolished,raw,beautiful!!!...Meeta, its amazing but hearing this song i realised that there is soo much in common between himachali and gurmukhi...we in punjabi also use words like puchdi,dheeyay,neendar,sadd lae,puvaadaan...:)...isn't it wonderful?...:)))

Meeta said...

You are right Leena. Himachal was part of Punjab before it became a separate state. Punjabi words abound in Himachali. Glad you liked the song.

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